चांपा में पुलिस हिरासत में शिव सहिस की मौत, परिजनों ने लगाया मारपीट का गंभीर आरोप
जांजगीर-चांपा, 12 सितंबर 2026। चांपा थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में युवक शिव सहिस की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया तथा चांपा थाने के बाहर विरोध-प्रदर्शन भी हुआ। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मामले में पुलिस विभाग की ओर से कार्रवाई भी की गई है।

चांपा में पुलिस हिरासत में शिव सहिस की मौत, परिजनों ने लगाया मारपीट का गंभीर आरोप

जांजगीर-चांपा, 12 सितंबर 2026। चांपा थाना क्षेत्र में पुलिस हिरासत में युवक शिव सहिस की मौत के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मृतक के परिजनों ने पुलिस पर हिरासत के दौरान मारपीट और प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों में आक्रोश देखा गया तथा चांपा थाने के बाहर विरोध-प्रदर्शन भी हुआ। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मामले में पुलिस विभाग की ओर से कार्रवाई भी की गई है।
मृतक के भाई ओम सहिस के अनुसार, 9 सितंबर को आबकारी अधिनियम के मामले में शिव सहिस को पुलिस ने हिरासत में लिया था। परिजन उसकी रिहाई अथवा न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने की मांग कर रहे थे। ओम सहिस का दावा है कि शिव की पत्नी और बेटे के थाने पहुंचने के दौरान बेटे ने पुलिसकर्मियों द्वारा शिव के साथ कथित मारपीट देखी।

परिजनों का आरोप है कि शिव के हाथों को कथित रूप से बांधा गया था और उसके पैरों के तलवों पर पट्टे से मारने जैसी कार्रवाई की गई। परिजनों के मुताबिक शिव ने अपनी पत्नी से यह भी कहा था कि उसे बहुत डर लग रहा है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
अगली सुबह परिजनों को शिव की तबीयत खराब होने और अस्पताल ले जाए जाने की सूचना मिली। परिजनों का दावा है कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो शिव की मृत्यु हो चुकी थी। परिवार ने उसके शरीर पर खून के निशान और चोट जैसे दिखाई देने वाले चिन्ह होने का भी आरोप लगाया है।
इस घटना को लेकर पुलिस और परिजनों के दावों में गंभीर अंतर सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों में पुलिस की ओर से यह कहा गया कि हिरासत के दौरान शिव की तबीयत बिगड़ी और उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जबकि परिजन आरोप लगा रहे हैं कि अस्पताल ले जाने से पहले ही उसकी मृत्यु हो चुकी थी। एक रिपोर्ट के अनुसार पुलिस का दावा था कि तबीयत बिगड़ने का कारण मिर्गी का दौरा था और मामले में एक आरक्षक को निलंबित किया गया।
वहीं, 11 सितंबर की रिपोर्टों के अनुसार पुलिस अधीक्षक विजय कुमार पाण्डेय ने चांपा थाना प्रभारी सहित तीन पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर किया और चांपा थाने की जिम्मेदारी दूसरे अधिकारी को सौंपी।
हिरासत में मौतों पर फिर उठे सवाल
शिव सहिस की मौत ने छत्तीसगढ़ में पुलिस हिरासत और पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाल ही में बिलासपुर के श्रवण सूर्यवंशी की हिरासत में मौत के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने जांच सीबीआई को सौंपने तथा परिजनों को 25 लाख रुपये अंतरिम मुआवजा देने का आदेश दिया था। सीबीआई ने बाद में मामले में हत्या की एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की।
ऐसे मामलों में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि पुलिस हिरासत में लिए गए व्यक्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है और यदि हिरासत में उसकी मौत होती है तो घटना की निष्पक्ष, पारदर्शी और स्वतंत्र जांच किस प्रकार सुनिश्चित की जाए।
शिव सहिस के परिजन पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों पर कार्रवाई और न्याय की मांग कर रहे हैं। अब निगाहें प्रशासनिक एवं न्यायिक जांच पर हैं कि शिव सहिस की मौत किन परिस्थितियों में हुई और इसके लिए वास्तव में कौन जिम्मेदार है।
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नोट: इस समाचार में मारपीट एवं पुलिस द्वारा प्रताड़ना से संबंधित बातें मृतक के परिजनों के आरोपों पर आधारित हैं। अंतिम तथ्य जांच, पोस्टमार्टम/मेडिकल रिपोर्ट और सक्षम जांच एजेंसी की निष्कर्ष रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होंगे।




